बीना के खुले परिसर में खड़े ऊँचे विद्युत उपकरण देश में विकसित 1200 केवी तकनीक की परीक्षण व्यवस्था हैं। पावरग्रिड ने भारतीय निर्माताओं और केंद्रीय विद्युत अनुसंधान संस्थान के साथ यह राष्ट्रीय परीक्षण केंद्र बनाया।

इसका उद्देश्य लंबी दूरी पर बड़ी मात्रा में बिजली पहुँचाने की तकनीक विकसित करना था। इसमें लाइन के लिए जमीन की जरूरत और पारेषण के दौरान होने वाली हानि जैसी चुनौतियाँ भी शामिल थीं।

भोपाल से बीना का संबंध

बीएचईएल के भोपाल कारखाने में बना 333 एमवीए का ट्रांसफार्मर इस प्रयास का एक हिस्सा था। कंपनी ने 27 मई 2011 को बताया कि दो साल के अनुसंधान के बाद उसका विकास और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार परीक्षण पूरा हुआ था।

इसे नए ट्रांसफार्मर ब्लॉक में नियंत्रित वातावरण में बनाया गया। उपकरण 1150/400/33 केवी का एकल-फेज ऑटो ट्रांसफार्मर था, जिसे बीना के प्रयोगात्मक केंद्र में लगाने की योजना थी।

परीक्षण से संचालन तक

पावरग्रिड का वर्तमान तकनीकी परिचय बताता है कि बीना केंद्र में 2016 से विद्युत प्रवाह शुरू हुआ। केंद्र का योगदान 1200 केवी तक के उपकरण देश में बनाने की क्षमता विकसित करने में है।

मुख्य बातें

  • 35 भारतीय निर्माता और सीपीआरआई इस साझेदारी में शामिल थे।
  • परीक्षण केंद्र में 2016 से विद्युत प्रवाह शुरू हुआ।
  • भोपाल में 333 एमवीए का ट्रांसफार्मर विकसित और परीक्षित हुआ।

स्रोत और संदर्भ

  1. POWERGRID · Technology Development: 1200 kV National Test Station, Bina ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
  2. BHEL · Indigenous 1200 kV transformer developed and tested at Bhopal ↗27 मई 2011

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 16 सितंबर 2026।

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